नेपोलियन के विरूद्ध जो तीसरा गुट "थर्ड कोलिएशन" निर्मित हुआ था। उसमें अब इंग्लैण्ड और रूस ही शेष बचे थे। अन्य सदस्य देश नेपोलियन के हाथों पराजित हो चुके थे। फलतः नेपोलियन रूस की ओर आगे बढ़ा और 8 जनवरी 1807 ई. को आइलो नामक स्थान पर दोनों सेनाओं के बीच भीषण युद्ध हुआ। 14 जून 1807 ई. को फ्रीडलैण्ड के युद्ध में नेपोलियन ने रूस को पराजित कर दिया। इस पराजय के बाद रूस के सम्राट जार एलेक्जेंडर ने नीमेन नदी में एक शाही नाव में नेपोलियन से भेंट की। इस अवसर पर नेपोलियन ने अपने आकर्षक प्रभावशाली व्यक्तित्व और मधुर शिष्टाचार से जार को प्रसन्न कर लिया। अंत में टिलसिट नगर में फ्रांस, रूस और प्रशास के प्रतिनिधियों में टिलसिट की संधि हो गई।
टिलसिट की संधि [8 जुलाई 1807 ई.]
टिलसिट की संधि में सार्वजनिक और गुप्त शर्तें थीं। जो इस प्रकार थी-
सार्वजनिक शर्तें:
- रूस और फ्रांस में परस्पर प्रभाव क्षेत्र निर्दिष्ट हो गया। अपने प्रभाव के विस्तार के लिए रूस को पूर्वी क्षेत्र और फ्रांस को पश्चिमी क्षेत्र प्राप्त हुआ। रूस को फिनलैंड और तुर्की की ओर अपने राज्य के विस्तार के लिए छूट दी गयी।
- फ्रांस, रूस से क्षतिपूर्ति के लिए कोई धनराशि या प्रदेश नहीं लेगा।
- प्रशा में एल्बा नदी के पश्चिमी क्षेत्र को अन्य जर्मन प्रदेशों से मिलाकर वेस्टफेलिया नामक नवीन राज्य निर्मित किया गया और नेपोलियन ने इस राज्य का शासक अपने भाई जेरोम बोनापार्ट को नियुक्त किया।
- पोलैण्ड ने प्रशा के अधिकांश क्षेत्र को लेकर 'ग्रेण्ड डची ऑफ वारसा' नामक राज्य निर्मित किया गया और यहां सेक्सनी के ड्यूक को राजा की उपाधि देकर शासक बनाया गया।
- रूस के सम्राट जार एलेक्जेंडर ने नेपोलियन द्वारा नवनिर्मित राज्यों को मान्यता दे दी और नेपोलियन द्वारा जीते गये इटली, जर्मनी तथा हालैण्ड के राज्यों को भी मान्यता दे दी।
गुप्त शर्तें:
- जार ने वचन दिया कि वह फ्रांस और इंग्लैण्ड में मध्यस्थ बनकर उनमें परस्पर मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित करने में सहायता करेगा। यदि एक मास की अवधि में इंग्लैण्ड समझौता करने के लिए सहमत नहीं हो तो रूस फ्रांस के साथ मिलकर इंग्लैण्ड के विरूद्ध युद्ध करेगा।
- डेनमार्क, स्वीडन और पुर्तगाल पर भी इंग्लैण्ड के विरूद्ध युद्ध करने तथा उसके साथ व्यापारिक संबंध तोड़ने और इंग्लैण्ड की जल शक्ति के विनाश करने के लिए दबाव डाला जाएगा।
- नेपोलियन, तुर्की और रूस में परस्पर मतभेदों के निवारण में और समझौता कराने में सहायता देगा। यदि तुर्की, समझौते के लिए सहमत नहीं हुआ तो फ्रांस और रूस मिलकर तुर्की साम्राज्य को परस्पर बांट लेंगे।
टिलसिट की संधि के परिणाम और महत्व
- इस संधि से आस्ट्रिया और प्रशा दोनों यूरोपीय राज्यों की शक्ति क्षीण हो गयी। प्रशा से राइनलैंड और पोलैण्ड के प्रदेश छीनकर उसका राज्य आधा कर दिया गया। अब वह यूरोप में तृतीय शक्ति बनकर रह गया। युद्ध की क्षतिपूर्ति के लिए भी उससे भारी धनराशि वसूल की गयी। इससे नेपोलियन के प्रति प्रशावासियों का घोर असंतोष बढ़ा।
- टिलसिट की संधि के समय से फ्रांस के राज्य की सीमाओं का खूब विस्तार हुआ। यूरोप के छोटे-छोटे राज्य नेपोलियन की सत्ता और शक्ति से भयभीत हो गये। रूस जैसा शक्तिशाली देश भी नेपोलियन का मित्र बन गया। इंग्लैण्ड को छोड़कर यूरोप के सभी देश नेपोलियन की शक्ति का लोहा मानने लगे।
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